Sunday, May 18, 2014

बुद्ध वाणी - 4


ये संसार जिसे हम यथार्थ मानते हैं दुःख और पीड़ा का क्षण भंगुर खेल है|
जो जन्मा है उसकी मृत्यु निशचित है | 
यही सृष्टि का नियम है ||

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